इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
Thursday, November 16, 2017
Friday, October 20, 2017
Wednesday, March 22, 2017
ये गुनाह करते हैं...
कभी खामोश तो कभी बयां करते हैं,
बे-वजह दिल को युं परेशां करते हैं,
जन्नत-ए-इश्क के मुकाम ने हमें तबाह कर दिया
फिर भी न जाने क्युं ये गुनाह करते हैं...
Translate:-
Kabhi Khamosh To Kabhi Bayaan Karte Hain,
Be-wajah Dil Ko Yun Pareshaan Karte Hain,
Jannat-E-Ishq Ke Mukaam Ne Hamen Tabaah Kar Diya
Fir Bhi N Jane Q Ye Gunaah Karte Hain ....
....इंदर भोले नाथ
Subscribe to:
Posts (Atom)
-
सोंख जाता है समंदर ये, बहुत प्रबल हो गया है खो कर जहाँ सारा पागल मुकम्मल हो गया है न आँधियों का डर रहा न अब बाढ़ से घबराता है लगता है द...
-
कीचड़ में शनी धरा झींगुरों की आवाज कानों मे गूंजती हुई सांय सांय करती हुई काली रात एक तरफ मेंढकों के टर्राने की आवाज तो दूसरी तरफ सांपों...
-
मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस ...
