बेख़बर हो चला हूँ मैं अपनी ही तबीयत से,
न जाने आजकल किस जहाँ मे खोया हुआ हूँ मैं…
….IBN
न जाने आजकल किस जहाँ मे खोया हुआ हूँ मैं…
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत