हर शख्स यहां अधुरा, हर रिश्ता बिखरा हुआ सा है,
आजकल मिजा़ज मेरे शहेर का कुछ उखड़ा हुआ सा है…
आजकल मिजा़ज मेरे शहेर का कुछ उखड़ा हुआ सा है…
…इंदर भोले नाथ
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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