इक तुहीं नहीं "इंदर" दिवाना उस कली का,
कल गुजरे जो गली से उनके,दिवान- ए- महफ़िल सजी मिली....
कल गुजरे जो गली से उनके,दिवान- ए- महफ़िल सजी मिली....
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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