मैं बह गया क़तरा क़तरा, मैं टुटा जा़र जा़र सा,
ये मेरी वफ़ा का ईनाम है, तेरी बेवफाई वजह नहीं...
ये मेरी वफ़ा का ईनाम है, तेरी बेवफाई वजह नहीं...
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
No comments:
Post a Comment