Tuesday, February 19, 2019

गज़ल

तुझे कोई इतना चाहे इस जमाने में नहीं होगा
मेरा दिल था मेरा दिल है मेरा दिल ही रहेगा सदा

मेरे ख्वाहिश मेरे अरमाँ हुए फना जिस पे वो
कातिल था वो कातिल है वो कातिल ही रहेगा सदा

वो मौजों की रवानी है वो दरियाँ की तूफानी है
मैं साहिल था मैं साहिल हूं मैं साहिल ही रहूंगा सदा

अधूरा इश्क़ ने ही हमको काबिल बना डाला वो
जाहिल था वो जाहिल है वो जाहिल ही रहेगा सदा

........ इंदर भोले नाथ



Thursday, February 14, 2019

दर्द

यह बात तमाचे कि नहीं जो बापू सा अहिंसावाद रहें
वो खून की होली खेल रहें और हम निराशावाद रहें

उतर के देखो सियासत से कभी उस घर में कितनी मातम है
वो दर्द रूह को छलनी कर दे वो जख्म सालों बाद रहे

क्यों मौन साधे यूं बैठे हो फिर तांडव का आगाज करो
उन्होंने 40 मारे हैं तुम 400 का शिकार करो

नदियां बहा दो खून की आतंकियों की रूह कांप उठे
यहां 40 का  अग्नि दाह हो वहां 400 का जनाजां उठे

..... इंदर भोले नाथ



Wednesday, February 13, 2019

ग़ज़ल

चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालात को सुधारे कोई


जो दुर्दशा है आज इस उजड़े चमन का
गुलिस्ताँ वतन का संवारे कोई


कब तक लड़ोगे जाति-मज़हब के नाम पर
हम इंसानो को कभी इंसान पुकारे कोई


नहीं माँगता "इंदर" तुमसे मुकम्मल जहाँ
क़तरा-क़तरा सही वतन को निखारे कोई


चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालत को सुधारे कोई


........इंदर भोले नाथ


 

Tuesday, February 12, 2019

शायरी

इंतेजार वो भी करती है सफर में साथ होने का,
लेकिन दर्द कलम ✒ को भी है कागज़ को चुभोने का.....

शायरी

सिलसिला शायद थम गया दिदार का लेकिन,
यादों में बसर रहने का सफ़र अब भी जारी है

Monday, February 11, 2019

शायरी

   ''               गुजर जायेंगे बनकर हवा तेरे आंगन से कभी
                 लीपट जायेंगे बनकर हवा तेरे दामन से कभी,

                        बसा रखा है अपनी आंखों में जो सागर मैने
                           बरस जायेंगे बनकर घटा तेरे सावन में कभी,




Sunday, February 10, 2019

गज़ल

वो सख्श मेरे सामने था खड़ा
मैं बस उसे देखता  ही रहा

सोचा उस से दो बातें करलें
पल दो पल की मुलाकातें कर लें

न जाने क्यूँ वो अपना सा लगा
वो सच था पर सपना सा लगा

इक कशिश थी उसकी आँखों में
इक बेचैनी थी उसकी  सांसों में

खुद को पाया मैंने उस में
न जाने क्यों वो आइना सा लगा

पहले भी मिला था शायद उससे
तब बड़ा ही दिल खुश लगता था

मगर आज कुछ खोया सा लगा
रूह तलक रोया सा लगा

नहीं था वो जुदा हमसे "इंदर"
वो शख्स मेरा साया सा लगा

....इंदर भोले नाथ