Saturday, February 23, 2019

"मन की बात"

"मन की बात"


"ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो " रमेश के मोबाइल मे लगा रिंग टोन बजा.......
रमेश :- "हेल्लो" कौन…


रमेश मैं महेश बोल रहा हूँ..... हाँ भैया, कहिए कैसे है, सब ठीक तो है न सुना है, भाभी की तबीयत खराब है ! हाँ रमेश तबीयत बहुत खराब है, अस्पताल मे भर्ती किए हैं.....वो....

अरे हाँ भैया अगर कोई बात हो तो बता दीजिएगा.....हम अभीं तो बीजी हूँ, बाद मे बात करता हूँ !
फ़ोन कट कर के रख दिया....अरे कौन था, रे रमेश........अरे उ भैया थें......भाभी की तबीयत......अरे तूँ क्या करेगा जान के चल तूँ पैग बना.........!!

२ महीने बाद जब रमेश घर आया, एक दिन खाना खा रहा था, तभी अचानक द्वार पे कोई आया ! और उसके बड़े भाई को भला बुरा कहने लगा !

अरे महेश २ महीने हो गये, तूने अभी तक मेरा उधार नहीं दिया, कब देगा मेरा पैसा...देख अगर तूने जल्द मेरा पैसा नहीं दिया तो मैं तेरी गाय खोल के ले जाउँगा !
अंदर खाना खा रहा रमेश अपनी पत्नी से.... अरे कौन चिल्ला रहा है, बाहर.....पत्नी- लाला है बड़े भाई साहब को भला बुरा कह रहा है !


रमेश- क्यों क्या हुआ..........अरे भाई साहब ने क़र्ज़ लिया था उससे, जब दीदी की तबीयत खराब थी ! वही माँगने आया होगा......
रमेश खाना छोड़ बाहर आकर, भैया आपने लाला से क़र्ज़ लिया था, जब भाभी की तबीयत खराब थी ! मैने आप को बोला था न के अगर पैसे की ज़रूरत हो तो मुझसे कहिएगा...........
महेश चुप-चाप खड़ा उसकी बातें सुन रहा था......एक शब्द नहीं बोल रहा था !
पास मे ही खड़ी महेश की पत्नी भी रमेश की बातें सुन रही थी, महेश के कुछ न बोलने पर..... वो बोली...

रमेश तुम्हे तो पता ही है, हमारी स्थिति.... खेतों मे इस साल फसल भी अच्छा नहीं हुआ ! तुम्हारे भैया को कोई काम भी नही मिलता, उनकी भी तबीयत आज-कल खराब ही रहती है ! तुम और तुम्हारी पत्नी हमारी परिस्थिति को भली-भाति जानते हो उस दिन तुम्हारे भैया ने पैसे के लिए ही तो तुम्हारे पास फ़ोन किया था ! जब उन्हे पता चला के मेरी तबीयत खराब है इसका तुम्हे पहले से पता था ! फिर भी तुमने फ़ोन करके मेरा हाल तक नहीं पूछा...........और तो और जब उन्होने फ़ोन किया तो तुमने कहा के कोई बात हो तो मुझे बता दीजिएगा......सब जानते हुए भी के हम किस स्थिति से गुजर रहे हैं, फिर तुम कह रहे हो के कोई बात हो तो बता दीजिएगा....ये कह कर तुमने फ़ोन काट दिया....! फिर दुबारा पूछे भी नही के भैया पैसे का इंतेजाम हुआ भी या नही !
रमेश जब तुम्हारे भैया के साथ मेरी शादी हुई थी, तब तुम ६ साल के थे ! शादी के दो साल बाद ही सासू माँ गुजर गई !
मैं आज भी तुम्हे देवर नहीं, अपना बेटा समझती हूँ ! जब तुम छोटे थे, तुम्हारे भैया अनपढ़ होते हुए भी मेहनत मज़दूरी करके तुम्हे पढ़ाया ! खुद पुराने कपड़े पहनते रहे पर तुम्हारे लिए नये सिलवाते थें ! तब तुमने अपने भैया से कहा था के भैया मुझे पढ़ना है, भैया मुझे नये कपड़े खरीद दो नही न.....क्योकि भैया तुम्हारी मन की बात समझते थें.........और अपना फ़र्ज़ निभाना चाहते थें !


और उस दिन रमेश.............जब भैया ने फ़ोन किया तो तुम उनकी मन की बात नहीं समझ पाए........

                                     
                                                  समाप्त

धन्यवाद... 

…. इंदर भोले नाथ
http://merealfaazinder.blogspot.in/2015/08/blog

Tuesday, February 19, 2019

गज़ल

तुझे कोई इतना चाहे इस जमाने में नहीं होगा
मेरा दिल था मेरा दिल है मेरा दिल ही रहेगा सदा

मेरे ख्वाहिश मेरे अरमाँ हुए फना जिस पे वो
कातिल था वो कातिल है वो कातिल ही रहेगा सदा

वो मौजों की रवानी है वो दरियाँ की तूफानी है
मैं साहिल था मैं साहिल हूं मैं साहिल ही रहूंगा सदा

अधूरा इश्क़ ने ही हमको काबिल बना डाला वो
जाहिल था वो जाहिल है वो जाहिल ही रहेगा सदा

........ इंदर भोले नाथ



Thursday, February 14, 2019

दर्द

यह बात तमाचे कि नहीं जो बापू सा अहिंसावाद रहें
वो खून की होली खेल रहें और हम निराशावाद रहें

उतर के देखो सियासत से कभी उस घर में कितनी मातम है
वो दर्द रूह को छलनी कर दे वो जख्म सालों बाद रहे

क्यों मौन साधे यूं बैठे हो फिर तांडव का आगाज करो
उन्होंने 40 मारे हैं तुम 400 का शिकार करो

नदियां बहा दो खून की आतंकियों की रूह कांप उठे
यहां 40 का  अग्नि दाह हो वहां 400 का जनाजां उठे

..... इंदर भोले नाथ



Wednesday, February 13, 2019

ग़ज़ल

चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालात को सुधारे कोई


जो दुर्दशा है आज इस उजड़े चमन का
गुलिस्ताँ वतन का संवारे कोई


कब तक लड़ोगे जाति-मज़हब के नाम पर
हम इंसानो को कभी इंसान पुकारे कोई


नहीं माँगता "इंदर" तुमसे मुकम्मल जहाँ
क़तरा-क़तरा सही वतन को निखारे कोई


चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालत को सुधारे कोई


........इंदर भोले नाथ


 

Tuesday, February 12, 2019

शायरी

इंतेजार वो भी करती है सफर में साथ होने का,
लेकिन दर्द कलम ✒ को भी है कागज़ को चुभोने का.....

शायरी

सिलसिला शायद थम गया दिदार का लेकिन,
यादों में बसर रहने का सफ़र अब भी जारी है

Monday, February 11, 2019

शायरी

   ''               गुजर जायेंगे बनकर हवा तेरे आंगन से कभी
                 लीपट जायेंगे बनकर हवा तेरे दामन से कभी,

                        बसा रखा है अपनी आंखों में जो सागर मैने
                           बरस जायेंगे बनकर घटा तेरे सावन में कभी,