Tuesday, February 12, 2019

शायरी

इंतेजार वो भी करती है सफर में साथ होने का,
लेकिन दर्द कलम ✒ को भी है कागज़ को चुभोने का.....

शायरी

सिलसिला शायद थम गया दिदार का लेकिन,
यादों में बसर रहने का सफ़र अब भी जारी है

Monday, February 11, 2019

शायरी

   ''               गुजर जायेंगे बनकर हवा तेरे आंगन से कभी
                 लीपट जायेंगे बनकर हवा तेरे दामन से कभी,

                        बसा रखा है अपनी आंखों में जो सागर मैने
                           बरस जायेंगे बनकर घटा तेरे सावन में कभी,




Sunday, February 10, 2019

गज़ल

वो सख्श मेरे सामने था खड़ा
मैं बस उसे देखता  ही रहा

सोचा उस से दो बातें करलें
पल दो पल की मुलाकातें कर लें

न जाने क्यूँ वो अपना सा लगा
वो सच था पर सपना सा लगा

इक कशिश थी उसकी आँखों में
इक बेचैनी थी उसकी  सांसों में

खुद को पाया मैंने उस में
न जाने क्यों वो आइना सा लगा

पहले भी मिला था शायद उससे
तब बड़ा ही दिल खुश लगता था

मगर आज कुछ खोया सा लगा
रूह तलक रोया सा लगा

नहीं था वो जुदा हमसे "इंदर"
वो शख्स मेरा साया सा लगा

....इंदर भोले नाथ

Friday, February 8, 2019

गज़ल

जीना मुश्किल था कभी जिनका हमारे बीना
आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

हमें देख कर कल निगाहें झुका ली
गैरों के लिए आज तैयार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

वो वो नहीं रहें अब जो छूई मूई सा लगा था
आशियाने से निकल कर बाजार हो गये हैं,

जो सहेम जाते थें रुह तक,देखकर काफिला
महफ़िलों में आज कल वो बेशुमार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

जो आंखों में ह़या थी अब काफूर सी हो गई हैं
कजरारे नैन आज कल तलवार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

.... इंदर भोले नाथ

Wednesday, February 6, 2019

गज़ल

जीन्हे भुलने में है.....हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें  दो वक्त याद आये तो होतें

बहाया अश्कों का सागर यादों में जिनके
काश़ वो आंसुओं के दो बूंद बहाये तो होतें

जीन्हे भुलने में है.....हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें

हमने सोंचा न था गम-ए-बयां लफ्जों से करेंगे
गर इस कदर इश्क़ में तुम"गालीब"बनाये न होते

जलता न दिल बारिश में भी...इस कदर युं
जो मैने आंखों में सावन बसायें ना होतें

जीन्हे भुलने में है हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें

.... इंदर भोले नाथ

Tuesday, February 5, 2019

गज़ल

                 
जब एहसास हो तेरे आने का लाज़मी है दिल का धड़कना भी,
मिलकर रुख्सत होने पर लाज़मी है दिल का तड़पना भी...

तेरे हर आह से हूं वाकिफ़ मैं मेरे हर दर्द की है खबर तुझे,
गर ख्वाहिश है इश्क मुकम्मल हो लाज़मी हैं दिल का बिखरना भी...

तेरा दिद हमें हो उस जगह तेरी आहट जहाँ मिलती न हो
इश्क़ जिश्म तक ही नहीं लाज़मी है रूह तक उतरना भी...

जब एहसास हो तेरे आने का लाज़मी है दिल का धड़कना भी,
मिलकर रुख्सत होने पर लाज़मी है दिल का तड़पना भी...