Monday, November 12, 2018

हमारा ज़िक्र और चलेगा तेरी महफ़िल में अभीं,
ज़िन्दगी को थोडा और  बे-नक़ाब तो होने दो... 

Friday, November 9, 2018

तूँ चाँद है फलक़ का,मैं मिट्टी का बादशाह 
तूँ ख्वाहिश है दिलों की,मैं यूँ ही बे-वजह

तूँ हुस्न है चमन का,मैं ख्वाहिश-ए-वीरान 
तूँ आगाज़-ए-आसमान है,मैं बुझता कारवाँ 

Thursday, November 1, 2018

कुछ आरज़ू मुक़म्मल हुए,हज़ारों सपने बिखर गयें...
हम मैं (खुदी) की तलाश में इक वक़्त सा गुज़र गयें...
अब दिल की ख्वाहिश है यही के ज़ारी यूँ सफ़र रहे...
सुकूं न मिले इक पल का भी ज़िन्दगी यूँ बसर रहे...

Saturday, August 11, 2018

वो मकाँ बाकी है…..

अबसारों पे अब भी दीद की निशाँ बाकी है
नाकाम-ए-इश्क़ मे अब भी इम्तेहाँ बाकी है
गुजर जाते हवाओं सा तेरे शहेर से “लेकिन”
जर्जर हुआ अब भी वो मकाँ बाकी है…..
“इंदर भोले नाथ”
Absaron Pe Ab Bhi Did Ki Nishan Baki Hai
Nakam-e-ishaq Me Ab Bhi Intehaan Baki hai
Gujar Jate Hawaon Sa Tere Sheher Se “Inder”
Lekin Jarjar Hua Ab Bhi Wo Makaan Baki Hai…..
“Inder Bhole Nath”