अब दिल की ख्वाहिश है यही के ज़ारी यूँ सफ़र रहे...
सुकूं न मिले इक पल का भी ज़िन्दगी यूँ बसर रहे...
सुकूं न मिले इक पल का भी ज़िन्दगी यूँ बसर रहे...
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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