Saturday, September 12, 2015

यादगार लम्हें :.....
अर्ज़ किया है :-
वो भी क्या दौर था, जब खुशियों का मज़ा डबल था,
वाह वाह वाह वाह.....
वो भी क्या दौर था, जब खुशियों का मज़ा डबल था,
प्यार के लिए माँ की गोद, मार के लिए हवाई चप्पल था....

कुछ पूरी, कुछ अधूरी है कहानी अपनी,
कुछ पाने की चाह मे,बीत रही जवानी अपनी..!
न जाने कब से चल रहें, मंज़िल की तलाश में,
कुछ कट चुकी, कुछ बाकी है जिंदगानी अपनी...!!

Monday, September 7, 2015

इस तन्हाई मे कुछ....तो बात है,
न जाने क्यूँ लगे....कोई साथ है...
सदियों से ढूंढते रहें,जिसे दर-बदर,
बनके साया वो चली,हर पहर साथ है...!!

Sunday, September 6, 2015


काश.......तेरी यादों की परछाई न होती,
हर महफ़िल मे इस क़दर रुसवाई न होती,
हम भी होते हर वक़्त ज़िंदगी से रूबरू,
ऐ-खुदा गर तूने मोहब्बत जैसी चीज़ बनाई न होती...!!

#मेरे_अल्फ़ाज़_इंदर
Acct-IBN_



Saturday, September 5, 2015

वही अपने सारे हैं......!!
चाँद भी वही तारे भी वही..!
वही आसमाँ के नज़ारे हैं...!!
बस नही तो वो "ज़िंदगी"..!
जो "बचपन" मे जिया करते थे...!!
वही सडकें वही गलियाँ..!
वही मकान सारे हैं.......!!
खेत वही खलिहान वही..!
बागीचों के वही नज़ारे हैं...!!
बस नही तो वो "ज़िंदगी"..!
जो "बचपन" मे जिया करते थे...!!

#मेरे_अल्फ़ाज़_इंदर
Acct-IBN_



हर दर्द से दोस्ती,
हर गम से याराना है.....!
तभी है शौक़ शायरी का,
और महफ़िल शायराना है....!!