कइ दर्द.......बेशुमार लिखा है
बरसों का.....इंतेज़ार लिखा है
जिसके ज़ुबाँ पे मेरा ज़िक्र तक नहीं
हमने उस पे अखबार लिखा है
बरसों का.....इंतेज़ार लिखा है
जिसके ज़ुबाँ पे मेरा ज़िक्र तक नहीं
हमने उस पे अखबार लिखा है
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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