किस क़दर हैं खाक हुएं इश्क़ में,उसे खबर ही नहीं,
मेरे हस्सर पे जहाँ रोया है,लेकिन उसे असर ही नहीं...
मेरे हस्सर पे जहाँ रोया है,लेकिन उसे असर ही नहीं...
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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