इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस ...
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सोंख जाता है समंदर ये, बहुत प्रबल हो गया है खो कर जहाँ सारा पागल मुकम्मल हो गया है न आँधियों का डर रहा न अब बाढ़ से घबराता है लगता है द...
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कीचड़ में शनी धरा झींगुरों की आवाज कानों मे गूंजती हुई सांय सांय करती हुई काली रात एक तरफ मेंढकों के टर्राने की आवाज तो दूसरी तरफ सांपों...

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