इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
Monday, April 11, 2016
Monday, April 4, 2016
Saturday, April 2, 2016
Friday, April 1, 2016
ख्वाबों की तरह..
ख्वाबों की तरह रुख्सत सी हुई
“ज़िंदगी” तूँ जब अब्सारों से…
है धुंधला सा हुआ चिराग-ए-दिल
राह-ए-उल्फत के नज़ारों से…
…इंदर भोले नाथ…
merealfaazinder.blogspot.in
Whatsapp- 9736423320
“ज़िंदगी” तूँ जब अब्सारों से…
है धुंधला सा हुआ चिराग-ए-दिल
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सोंख जाता है समंदर ये, बहुत प्रबल हो गया है खो कर जहाँ सारा पागल मुकम्मल हो गया है न आँधियों का डर रहा न अब बाढ़ से घबराता है लगता है द...
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कीचड़ में शनी धरा झींगुरों की आवाज कानों मे गूंजती हुई सांय सांय करती हुई काली रात एक तरफ मेंढकों के टर्राने की आवाज तो दूसरी तरफ सांपों...
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मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस ...




