Saturday, September 19, 2015

ज़रूरी तो नहीं दर्द-ए-शायरी,
लिखने वाला दिल,मोहब्बत मे ही टूटा हो...
दर्द और भी बेशुमार हैं,इस जमाने मे,
जो काफ़ी हैं,दर्द-ए-अल्फ़ाज़ बनाने मे...



जलें सौ मरतबा,
शमा की चाह मे परवानें,
कभी हुई हस्ती फन्ना उनकी,
कभी बिखर गये आशियानें.....!!


कोई तो ख़लिश है,इस गुजरती शाम मे,
जब भी आती है,दिल तड़प सा जाता है...



Thursday, September 17, 2015

कुछ इस कदर से अब,तुझे अपना समझने लगें,
खुद का ख़याल भी अब,बस तेरे लिए रखते हैं.....

Acct- IBN_


Monday, September 14, 2015

भीगती है रूह-ए-बंजर बस,
तेरी यादों के साये मे...
ये मुलाकात तो बस जिस्म की,
प्यास मिटाती है....

मुद्दतो बीते.....तेरे दिदार को ऐ-इंदर,


के अब तो ख़यालों मे भी तेरा चेहरा
फीका सा पड़ गया है.....!!


हर आँसू के छलकते पैमाने पे,तेरा नाम लिख दिया,
हर दर्द से निकली आह पे, तेरा नाम लिख दिया...!
तूँ फ़िक्र ना कर हमारी "ज़िंदगी" का "इंदर",
तेरी यादों के नाम, मैने "ज़िंदगी" तमाम लिख दिया...!!