इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
Saturday, May 7, 2016
Wednesday, April 27, 2016
Sunday, April 24, 2016
Saturday, April 16, 2016
महेज इक
महेज इक इत्तेफ़ाक था,
तेरी मुलाक़ातों का वो सिलसिला
वरना यूँ यादों के ज़रिये,
हमारी ज़िंदगी तो ना कटती…
…इंदर भोले नाथ…
http://merealfaazinder.blogspot.in/
तेरी मुलाक़ातों का वो सिलसिला
वरना यूँ यादों के ज़रिये,
हमारी ज़िंदगी तो ना कटती…
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सोंख जाता है समंदर ये, बहुत प्रबल हो गया है खो कर जहाँ सारा पागल मुकम्मल हो गया है न आँधियों का डर रहा न अब बाढ़ से घबराता है लगता है द...
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कीचड़ में शनी धरा झींगुरों की आवाज कानों मे गूंजती हुई सांय सांय करती हुई काली रात एक तरफ मेंढकों के टर्राने की आवाज तो दूसरी तरफ सांपों...
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मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस ...



