Saturday, May 7, 2016

अब ज़िंदगी संवर जाने दे…

ऐ-वक़्त है गुज़ारिश,अब निखर जाने दे
गमों की इन आँधियों को,अब गुजर जाने दे
ख्वाहिश सदियों की तुझसे,रखता नहीं है “इंदर”
चन्द लम्हों मे ही सही,अब ज़िंदगी संवर जाने दे…
…इंदर भोले नाथ…
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Wednesday, April 27, 2016

वो चाँद कभी...

ये सितारें जो युं इतरा रहे हैं आज
जिस चाँद की रौशनी पे
शायद इन्हें खबर नहीं है
वो चाँद कभी हमारा हुआ करता था
… इंदर भोले नाथ…
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Sunday, April 24, 2016

खूबसूरत और पाक...

खूबसूरत और पाक है ये मोहब्बत
दो जिस्म इक जां है ये मोहब्बत
मुकम्मल हो जाती है,ज़िंदगी इसमे
दिल की चाहत,रूह की प्यास है ये
मोहब्बत……
…इंदर भोले नाथ…
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Saturday, April 16, 2016

तेरा ज़िक्र

तेरा ज़िक्र जब भी हुआ मेरे फसाने मे
मेरी वो हर शाम गुज़री मयखाने मे…
…इंदर भोले नाथ…

इक वक़्त था

इक वक़्त था मैं ठहरा हुआ सा
तूँ क्या मीली ज़िंदगी चल पड़ी
…इंदर भोले नाथ…

महेज इक

महेज इक इत्तेफ़ाक था,
तेरी मुलाक़ातों का वो सिलसिला
वरना यूँ यादों के ज़रिये,
हमारी ज़िंदगी तो ना कटती…
…इंदर भोले नाथ…
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क्या तारीफ करूँ

क्या तारीफ करूँ,उस गुल की मैं
जिसकी खुश्बू से,निखरा ये गुलशन है
…इंदर भोले नाथ…
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