घात लगाये ब्याध है बैठा, सहमा हर परिंदा है
पूछ रही रावण की वेदना पूछ रहा असुर दल है
जला रहे हो रावण को क्या तुममें राम जिंदा हैं
वासिंदा- नागरिक
ब्याध- शिकारी
©® इंदर भोले नाथ
बागी बलिया उत्तर प्रदेश
इंदर भोले नाथ....... आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत
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