Friday, June 24, 2016

बर्बादी का अंजाम लिख दिया…

किसी ने जख्म तो किसी ने
आसुओं का ज़ाम लिख दिया,
किसी ने रुसवाई तो किसी ने
दर्द का पैगाम लिख दिया,
राह-ए-उल्फ़त मे मोहब्बत को
नजाने कितने नाम दिए दीवानों ने,
किसी ने एहसास-ए-जन्नत तो
किसी ने बर्बादी का अंजाम लिख दिया…
…इंदर भोले नाथ…
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Wednesday, June 22, 2016

कहीं डूबा है कोई यादों मे…

कहीं जख्म है नासूर बनें,कहीं समंदर बसा है आँखों मे,
कहीं तन्हा हुआ सा है कोई,कहीं सुलग रहा कोई रातों मे…
कुछ इस क़दर बेताब हुए, दीवानें राह-ए-उल्फ़त मे,
कहीं जीना कोई भूल बैठा, तो कहीं डूबा है कोई यादों मे…
…इंदर भोले नाथ…
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वीरानो में बना बैठे हैं…

कम्बख़्त ये तन्हाई भी न
कुछ इस क़दर हमें अपना बना बैठी है, के
इसका बसेरा मुझमे नहीं, हम
अपना आशियाना ही वीरानो में बना बैठे हैं…
…इंदर भोले नाथ…
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ये शिकायत भी है…

ये शिकायत भी है उनका के हम उन्हे याद नहीं करते,
और अपनी हिचक़ियों का कुसूरवार भी हमें बताते हैं…
…इंदर भोले नाथ…
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Monday, June 20, 2016

जुनून-ए-इश्क़

जुनून-ए-इश्क़ का दस्तूर भी अजीब है,
जो कभी अपना था ही नहीं,उसे गैर नहीं मानता…
…इंदर भोले नाथ…
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मिट्टी के घरौंदे…IBN

उसकी हर एक बूँद से पिघलते
देखा है मैने मिट्टी के उन घरौंदों को…
जिस बरसात की आरज़ू पत्थरों के
महल हर रोज किया करते हैं…..
…इंदर भोले नाथ…
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Sunday, June 5, 2016